सिंधु जल संधि पर भारत का स्पष्ट संदेश—पहले आतंकवाद बंद करो, तभी भरोसा बहाल होगा
अमेरिका में भारत के राजदूत ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत का स्पष्ट और कड़ा रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि यह संधि केवल पानी के बंटवारे का समझौता नहीं थी, बल्कि आपसी विश्वास, सद्भावना और सहयोग की भावना पर आधारित थी। लेकिन पाकिस्तान द्वारा दशकों से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और विश्वास को लगातार कमजोर करने के कारण परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
क्वात्रा ने कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि लंबे समय से बने सुरक्षा और विश्वास के संकट की प्रतिक्रिया है। उनका कहना था कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता, तब तक सामान्य संबंधों और भरोसे की बहाली संभव नहीं है।
भारत का संदेश साफ है कि आतंकवाद और वार्ता या सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते। नई दिल्ली का मानना है कि किसी भी द्विपक्षीय समझौते की सफलता के लिए पारस्परिक विश्वास और दायित्वों का पालन आवश्यक है, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान को निभानी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की उसी नीति को मजबूत करता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आतंकवाद पर किसी प्रकार का समझौता न करने की बात कही जाती है।

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