6 माह की सजा, 7.03 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश
जिला न्यायालय इंदौर ने चेक बाउंस के एक मामले में ग्रेटर कैलाश हॉस्पिटल के संचालक को दोषी ठहराते हुए 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने शिकायतकर्ता को 7 लाख 3 हजार 500 रुपये प्रतिकर देने का भी आदेश दिया है। यह निर्णय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत ने सुनाया।
2018 में लिया था 5 लाख रुपये का ऋण
अदालती अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2018 में व्यापारी से डॉ. अनिल बंडी ने 5 लाख रुपये उधार लिए थे। शिकायत के अनुसार यह राशि 1.15 प्रतिशत मासिक ब्याज की दर से एक वर्ष के लिए ली गई थी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भुगतान नहीं होने पर विवाद उत्पन्न हुआ और मामला न्यायालय पहुंचा।
चेक अनादर के बाद दर्ज हुआ परिवाद
ऋण चुकाने के लिए दिया गया चेक बैंक से अनादृत (बाउंस) हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत परिवाद दायर किया। लगभग छह वर्ष तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना।
7.03 लाख रुपये का प्रतिकर
न्यायालय ने 5 लाख रुपये की मूल राशि के साथ ब्याज, परिवाद व्यय और न्यायालय शुल्क जोड़कर कुल 7 लाख 3 हजार 500 रुपये शिकायतकर्ता को प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया। आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
शिकायतकर्ता की ओर से पैरवी
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता , और ने पैरवी की।
बौद्धिक प्रतिकार की टिप्पणी:
चेक बाउंस के मामलों में यह फैसला एक संदेश माना जा रहा है कि वित्तीय लेन-देन में जारी किए गए चेक की कानूनी जिम्मेदारी से बचना आसान नहीं है। यदि चेक अनादृत होता है और आरोप सिद्ध हो जाता है, तो आर्थिक दायित्व के साथ कारावास की सजा भी हो सकती है।

Post a Comment