हरा मतलब कम जोखिम, लाल मतलब बहुत ज्यादा जोखिम; निवेशक सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला न लें
नई दिल्ली। बॉन्ड और ऋण आधारित निवेश को आसान भाषा में समझाने के लिए बाजार नियामक सेबी ने जोखिम को रंगों के जरिए दिखाने की व्यवस्था को प्रमुख बनाया है। जोखिम-मीटर में निवेश के जोखिम को छह स्तरों में बांटा गया है—कम से लेकर बहुत अधिक जोखिम तक। सेबी के अनुसार यह व्यवस्था निवेशकों को किसी योजना के जोखिम को एक नजर में समझने में मदद करती है।
रंगों में हरा कम जोखिम, हल्का हरा कम से मध्यम, पीला मध्यम, भूरा मध्यम से अधिक, नारंगी अधिक और लाल बहुत अधिक जोखिम को दर्शाता है। इसका उद्देश्य निवेशक को केवल संभावित रिटर्न देखने के बजाय जोखिम पर भी ध्यान देने के लिए सचेत करना है।
हालांकि जोखिम-मीटर को सुरक्षित होने की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। बॉन्ड में भी जारीकर्ता की साख, ब्याज दर में बदलाव, बाजार में खरीद-बिक्री की उपलब्धता और समय से पहले पैसा निकालने की स्थिति जैसे जोखिम हो सकते हैं। इसलिए केवल अधिक ब्याज देखकर निवेश करना नुकसानदेह हो सकता है।
सेबी ने ऋण बाजार में निवेशकों की जागरूकता बढ़ाने के लिए 2026 में भी कई कदम उठाए हैं। जुलाई में नियामक ने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को लेकर निवेशक जागरूकता सामग्री जारी की थी।
निवेशक के लिए सीधा नियम: रंग को शुरुआती संकेत मानें, अंतिम फैसला नहीं। निवेश से पहले बॉन्ड जारी करने वाली संस्था, साख-रेटिंग, अवधि, ब्याज और निकासी की शर्तों को जरूर पढ़ें।

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