रूसी तेल पर भारत की निर्भरता का नया रिकॉर्ड, हिस्सेदारी 50 फीसदी के पार

जुलाई में रूस से 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आया; मध्य-पूर्व की आपूर्ति घटने से बढ़ी खरीद



नई दिल्ली। रूस से कच्चे तेल की खरीद के मामले में भारत ने नया रिकॉर्ड बनाया है। जुलाई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50.83 प्रतिशत पहुंच गई। रूस से करीब 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल भारत आया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62.4 प्रतिशत अधिक है।


आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जुलाई के बीच भी रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रहा। इस अवधि में कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 43.25 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह करीब 37 प्रतिशत थी। इसके उलट मध्य-पूर्व से भारत की खरीदारी का हिस्सा 43 प्रतिशत से घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गया।


तेल खरीद में यह बदलाव मुख्य रूप से मध्य-पूर्व में आपूर्ति संकट और समुद्री मार्गों में आई बाधाओं के बाद हुआ। भारतीय रिफाइनरियों ने अपेक्षाकृत भरोसेमंद रूसी आपूर्ति का रुख किया। हालांकि रूसी तेल की बढ़ती मांग के कारण उसकी कीमत में मिलने वाली छूट भी जुलाई के अंत तक काफी कम हो गई थी।


भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में रूस पर बढ़ती निर्भरता भारत को सस्ता तेल उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है, लेकिन साथ ही अमेरिकी प्रतिबंधों और शुल्क संबंधी दबाव का जोखिम भी बढ़ाती है।


सवाल यह है कि सस्ता रूसी तेल भारत के लिए आर्थिक फायदा है या बदलते वैश्विक समीकरणों में नई रणनीतिक निर्भरता?

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