भारत में बढ़ रहा आइस थेरेपी और कोल्ड प्लंज का क्रेज, फायदे से ज्यादा जरूरी है सावधानी

खेल और फिटनेस से निकला चलन अब वेलनेस सेंटरों तक पहुंचा; विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ फायदे संभव, लेकिन हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं



नई दिल्ली। फिटनेस और वेलनेस की दुनिया में आइस थेरेपी और कोल्ड प्लंज का चलन तेजी से चर्चा में है। जिम, खेल प्रशिक्षण केंद्रों और वेलनेस सेंटरों में लोग कुछ मिनट ठंडे पानी या बर्फ मिले पानी में शरीर डुबोने का अभ्यास कर रहे हैं। इसके पीछे मांसपेशियों की थकान कम करने, व्यायाम के बाद दर्द और सूजन घटाने तथा शरीर को अधिक सक्रिय महसूस कराने जैसे दावे किए जाते हैं।


वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार ठंडे पानी में शरीर डुबोने से कठिन व्यायाम के बाद होने वाली मांसपेशियों की क्षति और दर्द में अल्पकालिक राहत मिल सकती है। हालांकि मूड, प्रतिरोधक क्षमता, वजन घटाने या समग्र स्वास्थ्य पर इसके बड़े फायदे साबित करने के लिए अभी पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं।


ठंडा पानी शरीर पर क्या करता है?


अचानक ठंडे पानी में जाने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और हृदय गति तथा रक्तचाप कुछ समय के लिए बढ़ सकते हैं। इसी कारण शरीर में तेज ठंड का झटका, सांस तेज चलना और चक्कर जैसी समस्या हो सकती है। बहुत देर तक ठंडे पानी में रहने से हाइपोथर्मिया का खतरा भी रहता है।


किन्हें बचना चाहिए?


हृदय या फेफड़ों की बीमारी, उच्च रक्तचाप, रेनॉड सिंड्रोम जैसी रक्तसंचार संबंधी समस्या वाले लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के कोल्ड प्लंज नहीं करना चाहिए।


निष्कर्ष: कोल्ड प्लंज कोई चमत्कारी इलाज नहीं है। स्वस्थ व्यक्ति भी इसे अचानक अत्यधिक ठंडे पानी में जाने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह और सुरक्षित वातावरण में ही आजमाए। खासकर खुले जलस्रोतों में अकेले ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।

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