नई दिल्ली। जिस टीके का इस्तेमाल आमतौर पर शिंगल्स यानी हर्पीज जोस्टर से बचाव के लिए किया जाता है, उसके बारे में सामने आई नई शोध ने चिकित्सा जगत का ध्यान खींचा है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि शिंगल्स का टीका लगवाने वाले लोगों में हृदयाघात और मस्तिष्काघात (स्ट्रोक) जैसी हृदय-रक्तवाहिका संबंधी घटनाओं का जोखिम कम दिखाई दिया।
अगस्त 2026 में सामने आए एक अध्ययन में अमेरिका के 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के करीब 70 हजार लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। शिंग्रिक्स टीका लेने के बाद साढ़े तीन साल तक हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम लगभग 12 प्रतिशत कम पाया गया। सात साल के पूरे अध्ययन काल में यह अंतर करीब 4 प्रतिशत रहा।
इसके पीछे एक संभावित कारण यह माना जा रहा है कि शिंगल्स स्वयं शरीर में सूजन और रक्तवाहिका संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। टीका शिंगल्स से बचाव करके अप्रत्यक्ष रूप से इस जोखिम को कम कर सकता है। प्रतिरक्षा तंत्र पर टीके के व्यापक प्रभाव की संभावना पर भी वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं।
हालांकि इसे अभी दिल या स्ट्रोक से बचाने वाला टीका कहना जल्दबाजी होगी। मौजूदा प्रमाण मुख्य रूप से अवलोकन आधारित हैं और कारण-परिणाम की पुष्टि के लिए यादृच्छिक चिकित्सकीय परीक्षणों की जरूरत है।
यानी खबर उत्साहजनक जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह के बिना केवल हृदय सुरक्षा के लिए शिंगल्स का टीका लगवाने का फैसला नहीं करना चाहिए।
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