पुणे। पुणे की एक मिठाई दुकान के लाइसेंस को निलंबित करने की खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने लाइसेंस निलंबन का आदेश रद्द करते हुए दुकान संचालकों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। दुकान करीब 34 दिनों तक बंद रही थी।
मामला खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन से संबंधित था। एफडीए की कार्रवाई के बाद दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। दुकान संचालकों ने अदालत में इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर कर दिया गया था और नियमों के पालन की दिशा में पर्याप्त कदम उठाए गए थे।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई के तरीके और उसके अनुपात पर सवाल उठाए। अदालत ने माना कि किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई करते समय संबंधित प्राधिकारी को प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों का पालन करने के साथ यह भी देखना चाहिए कि कार्रवाई परिस्थितियों के अनुपात में है या नहीं।
अदालत के आदेश के बाद लाइसेंस निलंबन का फैसला रद्द कर दिया गया और दुकान संचालकों को आर्थिक नुकसान के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।
यह मामला खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन नियामक संस्थाओं की कार्रवाई भी कानून, उचित प्रक्रिया और निष्पक्षता के दायरे में होनी चाहिए। हाईकोर्ट का फैसला इसी संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है।

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