उद्योग की जमीन पर कारोबार का खेल, 891 इकाइयां जांच के घेरे में

 


भोपाल। मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए रियायती दरों पर आवंटित सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश के 45 जिलों में औद्योगिक भूखंडों की जांच के दौरान 891 से अधिक इकाइयों को नोटिस जारी किए गए। इनमें 387 इकाइयों की लीज निरस्त की जा चुकी है, जबकि 61 भूखंड सरकार ने वापस ले लिए हैं।



जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां उद्योग के लिए आवंटित जमीन पर उत्पादन इकाई चलाने के बजाय शोरूम, गोदाम, होटल, किराना दुकान और दूसरे व्यावसायिक कारोबार संचालित किए जा रहे थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिस उद्देश्य से जमीन आवंटित की गई है, उसका पालन नहीं होने पर लीज निरस्त की जा सकती है और भूखंड वापस लिया जा सकता है।


सबसे ज्यादा कार्रवाई उज्जैन और खरगोन में सामने आई है। दोनों जिलों में 235 इकाइयों को लीज निरस्तीकरण के नोटिस दिए गए। इनमें 110 इकाइयों की लीज रद्द हो चुकी है और 27 भूखंड सरकार अपने कब्जे में ले चुकी है।


भोपाल के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में भी कई बड़े समूह जांच के दायरे में हैं। यहां औद्योगिक गतिविधियों के लिए आवंटित जमीन पर कार शोरूम समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियां मिलने की जानकारी सामने आई है।


सरकार आगामी निवेश गतिविधियों से पहले औद्योगिक भूखंडों की समीक्षा कर रही है। सवाल यह है कि रियायती सरकारी जमीन उद्योग और रोजगार के लिए दी गई थी, तो वर्षों तक उसका व्यावसायिक इस्तेमाल कैसे चलता रहा? अब कार्रवाई के साथ यह भी देखना होगा कि जिम्मेदारी केवल भूखंड धारकों की तय होती है या आवंटन और निगरानी करने वाले तंत्र की भी जवाबदेही तय होगी।

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