भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 10 अगस्त 2026 तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ₹8.11 लाख करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 23.09 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल यह आंकड़ा करीब ₹6.59 लाख करोड़ था।
ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन भी 19.75 प्रतिशत बढ़कर ₹9.54 लाख करोड़ हो गया। इस दौरान करदाताओं को दिए गए रिफंड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस बढ़ोतरी में गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह की बड़ी भूमिका रही। इसमें व्यक्तिगत आयकर के साथ हिंदू अविभाजित परिवार, फर्म और अन्य गैर-कॉरपोरेट संस्थाओं से मिलने वाला कर शामिल है। इस श्रेणी का संग्रह बढ़कर करीब ₹5.07 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹4.11 लाख करोड़ था।
आंकड़े बताते हैं कि सरकार का प्रत्यक्ष कर आधार मजबूत हुआ है। हालांकि सिर्फ कर संग्रह बढ़ना अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर नहीं बताता; इसके पीछे आय में वृद्धि, कर अनुपालन और कर आधार के विस्तार जैसे कई कारण हो सकते हैं।
फिलहाल सरकार के लिए बढ़ता प्रत्यक्ष कर संग्रह राजस्व मोर्चे पर राहत का संकेत जरूर है।

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