भारत का करीब 62 लाख करोड़ रुपये का रियल एस्टेट बाजार अब सिर्फ सीमेंट, ईंट और जमीन के भरोसे नहीं चल रहा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तेजी से निर्माण और परियोजना प्रबंधन का हिस्सा बन रही है।
डेवलपर एआई की मदद से जमीन का आकलन, मांग का अनुमान, परियोजना डिजाइन, निर्माण की निगरानी, सामग्री की जरूरत, कीमत तय करने और बिक्री जैसे फैसलों का विश्लेषण कर रहे हैं। यानी पहले जिन फैसलों में लंबा समय लगता था, उनमें अब आंकड़ों के आधार पर तेजी से निर्णय लिए जा रहे हैं।
निर्माण में भी बदलेगा खेल
एआई निर्माण स्थल की प्रगति पर नजर रखने, काम में देरी का अनुमान लगाने, गुणवत्ता जांच, मजदूरों की उत्पादकता और सामग्री की खरीद को बेहतर बनाने में इस्तेमाल हो रही है। कुछ कंपनियों ने इससे परियोजनाओं का समय घटाने और लागत बचाने के फायदे भी दर्ज किए हैं।
ईवाई-पार्थेनन और क्रेडाई की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जनरेटिव एआई अपनाने वाले डेवलपर बिक्री की गति में 30 से 50 प्रतिशत तक सुधार और परियोजनाओं को बाजार में लाने के समय में करीब 30 प्रतिशत तक कमी की संभावना देख सकते हैं।
लेकिन एआई इंसान की जगह पूरी तरह नहीं लेगी। जमीन, कानूनी मंजूरी, निर्माण गुणवत्ता और बड़े वित्तीय फैसलों में मानवीय निगरानी अभी भी जरूरी रहेगी।
यानी रियल एस्टेट का अगला मुकाबला सिर्फ जमीन और पूंजी का नहीं, बल्कि आंकड़ों और तकनीक का भी होने वाला है।

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