दो मामलों में 26.40 करोड़ का अर्थदंड, जेल की सुरक्षा से खिलवाड़ भी उजागर
प्रणव बजाज
इंदौर जिले में अवैध खनन माफिया के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपर कलेक्टर रिकेश वैश्य ने दो अलग-अलग मामलों में अवैध मुरम खनन को प्रमाणित मानते हुए भूमिस्वामियों, कॉलोनाइजरों और मशीन मालिकों पर 26 करोड़ 40 लाख 53 हजार 500 रुपये से अधिक का अर्थदंड लगाया है। आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि अब खनिज संपदा की लूट करने वालों को केवल नोटिस नहीं, बल्कि भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा
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30 हजार की अनुमति, निकाली 80 हजार घनमीटर से अधिक मुरम
ग्राम रिंगनोदिया (तहसील सांवेर) में भूमि समतलीकरण के नाम पर केवल 30 हजार घनमीटर मुरम निकालने की अनुमति दी गई थी। जांच में 80,204.811 घनमीटर मुरम निकाले जाने की पुष्टि हुई। यानी स्वीकृत सीमा से लगभग 50 हजार घनमीटर अधिक खनन किया गया।
कॉलोनी विकास की आड़ में नियमों का उल्लंघन
जांच में सामने आया कि कॉलोनी विकास की अनुमति मिलने के बावजूद खनिज नियमों का पालन नहीं किया गया। न्यायालय ने माना कि भूमिस्वामी और डेवलपर की मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन संभव नहीं था।
24 करोड़ से अधिक का अर्थदंड
मामले में भूमिस्वामी सतीश चौधरी तथा वाइब्रेंट वृक्ष डेवलपर्स के पार्टनर अमित पारिख पर 24 करोड़ 6 लाख 16 हजार 460 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। आदेश में राशि जमा नहीं करने पर भू-राजस्व की तरह वसूली के निर्देश भी दिए गए हैं।
जेल की सुरक्षा से भी किया खिलवाड़
मामले का सबसे गंभीर पहलू केंद्रीय जेल की सुरक्षा से जुड़ा मिला। अनुमति की शर्तों के अनुसार जेल सीमा से 20 मीटर दूरी छोड़कर ही खनन होना था, लेकिन जांच में खुदाई सिर्फ 10.60 मीटर तक पहुंची मिली। प्रशासन ने इसे संवेदनशील सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही माना।
दूसरे मामले में मशीन मालिक भी दोषी
ग्राम माचला (तहसील राऊ) में 7,811.671 घनमीटर मुरम का बिना अनुमति खनन पाया गया। न्यायालय ने भूमिस्वामियों के साथ खनन में प्रयुक्त मशीनों के मालिकों को भी जिम्मेदार माना।
इस मामले में गोपीचंद, चंपाबाई, राजेश जिराती और सुधीर चौधरी पर 2 करोड़ 34 लाख 37 हजार 40 रुपये का अर्थदंड लगाया गया तथा मशीनों की सुपुर्दगी भी निरस्त कर दी गई।
भूमिस्वामी भी नहीं बचेंगे
अपर कलेक्टर के आदेश ने स्पष्ट किया कि यदि किसी की भूमि पर अवैध खनन होता है और वह इसकी सूचना प्रशासन को नहीं देता, तो उसे भी समान रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। यह आदेश भविष्य के मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि अब अवैध खनन के मामलों में केवल वाहन जब्त करने या एफआईआर दर्ज करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। खनिज संपदा की चोरी से हुए आर्थिक नुकसान का पूरा आकलन कर दोषियों से उसकी भरपाई भी कराई जाएगी। यह कार्रवाई अवैध खनन माफिया के खिलाफ सख्त प्रशासनिक रुख का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।

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