2.50 लाख और 12.50 लाख रुपए के दो चेक हुए अनादरित, न्यायालय ने लगाया कुल 16 लाख रुपए का जुर्माना
इंदौर। पारिवारिक रिश्तों के बीच हुआ आर्थिक लेन-देन आखिरकार अदालत की चौखट तक पहुंच गया। चेक अनादरण के मामले में जिला न्यायालय ने भाई और भाभी को दोषी ठहराते हुए 6-6 माह के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों पर कुल 16 लाख रुपए का जुर्माना भी निर्धारित किया है। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट सृष्टि अग्निहोत्री के न्यायालय में हुई।
मामला धनंजय गुंजाल और पल्लवी धनंजय गुंजाल की ओर से दायर किया गया था। परिवादी पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय अधिवक्ता राजेश जोशी ने पैरवी की।
दो चेक, दोनों का भुगतान नहीं हुआ
न्यायालयीन रिकॉर्ड के अनुसार मामले में 10 जनवरी 2014 के दो चेक शामिल थे। चेक क्रमांक 297079 से 2.50 लाख रुपए की राशि का भुगतान होना था, लेकिन बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर वह ‘स्टॉप पेमेंट’ के कारण अनादरित हो गया। दूसरा चेक क्रमांक 297078, 12.50 लाख रुपए का था, जो अपर्याप्त निधि के कारण अनादरित हुआ।
चेक वापस होने के बाद परिवादी पक्ष ने आरोपियों को कानूनी नोटिस भेजा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत न्यायालय में शिकायत दायर की गई।
भाई-भाभी के खिलाफ बहन-जीजा ने दायर किया था मामला
इस मामले की खास बात यह है कि विवाद किसी कारोबारी लेन-देन का नहीं, बल्कि परिवार के भीतर हुए आर्थिक लेन-देन से जुड़ा था। आरोपी पक्ष में शामिल व्यक्ति परिवादी का भाई और उसकी पत्नी भाभी बताई गई हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार पारिवारिक संबंध होने के कारण लेन-देन के समय अलग से विस्तृत लिखित दस्तावेज तैयार नहीं किए गए थे। बाद में राशि की वापसी को लेकर विवाद हुआ और आरोपियों की ओर से दिए गए चेक अनादरित होने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा।
2012 में दी गई थी राशि
न्यायालयीन रिकॉर्ड के अनुसार 24 फरवरी 2012 को परिवादी के सास-ससुर की सालगिरह के अवसर पर आर्थिक सहायता के रूप में राशि दिए जाने का उल्लेख है। राशि एक वर्ष के भीतर लौटाने का आश्वासन दिया गया था। बाद में राशि वापस मांगे जाने पर दिसंबर 2013 में आरोपियों द्वारा संयुक्त बैंक खाते से दोनों चेक जारी किए गए।
जनवरी 2014 में चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए। एक चेक पर ‘स्टॉप पेमेंट’ और दूसरे पर अपर्याप्त राशि होने के कारण बैंक ने भुगतान रोक दिया।
बचाव पक्ष ने भी रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने चेक की प्रकृति, कथित देनदारी और लेन-देन की परिस्थितियों को लेकर अपना पक्ष न्यायालय के सामने रखा। परिवादी पक्ष ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपों का समर्थन किया।
परिवादी धनंजय गुंजाल एवं पल्लवी धनंजय गुंजाल की ओर से अधिवक्ता राजेश जोशी ने प्रकरण से जुड़े कानूनी और तथ्यात्मक पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
छह-छह माह की सजा, 16 लाख रुपए जुर्माना
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और 6-6 माह के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही कुल 16 लाख रुपए का जुर्माना निर्धारित किया गया।
पारिवारिक संबंधों के बीच शुरू हुआ आर्थिक लेन-देन वर्षों बाद चेक अनादरण के मुकदमे में बदल गया। मामला यह भी बताता है कि रिश्तेदारी में होने वाले बड़े आर्थिक लेन-देन में पर्याप्त दस्तावेज और स्पष्ट शर्तें नहीं होने पर विवाद गंभीर कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है।
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