चार उच्च न्यायालयों में 30 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी, मध्यप्रदेश को मिला एक न्यायाधीश

 


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मद्रास, कलकत्ता, मध्यप्रदेश और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में कुल 30 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। इन नियुक्तियों के बाद संबंधित उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है।



मद्रास उच्च न्यायालय में सबसे ज्यादा नियुक्तियां


कुल 30 नियुक्तियों में सबसे अधिक 15 न्यायाधीश मद्रास उच्च न्यायालय में नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा कलकत्ता उच्च न्यायालय में 8, कर्नाटक उच्च न्यायालय में 6 और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में 1 न्यायाधीश की नियुक्ति हुई है।


20 वकील और 10 न्यायिक अधिकारी


कानून एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार, नवनियुक्त 30 न्यायाधीशों में 20 अधिवक्ता और 10 न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। इसका मतलब है कि उच्च न्यायालयों को बार और न्यायिक सेवा—दोनों क्षेत्रों से नए न्यायाधीश मिले हैं।


राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति


इन नियुक्तियों को राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की सलाह के बाद मंजूरी दी है। नियुक्त न्यायाधीश निर्धारित प्रक्रिया के तहत शपथ लेने के बाद अपने-अपने उच्च न्यायालयों में कार्यभार संभालेंगे।


मध्यप्रदेश को एक नया न्यायाधीश


मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में एक न्यायाधीश की नियुक्ति को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में लंबित मामलों का दबाव लगातार न्यायपालिका के सामने चुनौती बना हुआ है। ऐसे में एक नई नियुक्ति से न्यायिक कार्यों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।


लंबित मामलों पर कितना पड़ेगा असर?


न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ सकती है। हालांकि, लंबित मामलों का तेजी से निपटारा केवल न्यायाधीशों की संख्या पर निर्भर नहीं करता। अदालती ढांचा, कर्मचारियों की उपलब्धता, मामलों की प्रकृति और सुनवाई की गति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


अब देखना होगा कि इन नियुक्तियों के बाद चारों उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे की रफ्तार कितनी बढ़ती है।

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