मेडिकेयर और इन्फोटेक हेल्थ केयर के निदेशकों पर एफआईआर, गुजरात के कारोबारी ने लगाए गंभीर आरोप
इंदौर। क्राइम ब्रांच ने करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के मामले में दो मेडिकेयर कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि गुजरात के एक कारोबारी को डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने और हर महीने लाखों रुपये मुनाफा देने का भरोसा दिलाकर एक करोड़ रुपये निवेश कराए गए, लेकिन बाद में न तो वादा पूरा किया गया और न ही राशि लौटाई गई।
इनको बनाया आरोपी
क्राइम ब्रांच ने मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक आदित्य गुप्ता और इन्फोटेक हेल्थ केयर के निदेशक मनोहर लाल गुप्ता को आरोपी बनाया है। कार्रवाई गुजरात के दाहोद निवासी कारोबारी कमलेश अग्रवाल की शिकायत और दस्तावेजों की जांच के बाद की गई।
गुजरात डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर लिया निवेश
पुलिस जांच के अनुसार आरोपियों ने कमलेश अग्रवाल को गुजरात क्षेत्र की डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने का प्रस्ताव दिया था। इसके लिए दोनों कंपनियों के नाम पर 50-50 लाख रुपये यानी कुल एक करोड़ रुपये निवेश के रूप में लिए गए।
शिकायत में बताया गया कि निवेश के बदले व्यापार के लिए माल उपलब्ध कराने और हर महीने निश्चित मार्जिन मनी देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन निवेश लेने के बाद शर्तों का पालन नहीं किया गया।
मार्केटिंग मैनेजर के जरिए हुआ संपर्क
क्राइम ब्रांच के मुताबिक कमलेश अग्रवाल गुजरात में बालाजी मेडिकोज के नाम से कारोबार करते हैं। उनका संपर्क कंपनियों के मार्केटिंग मैनेजर जिग्नेश भाई मिस्त्री के माध्यम से हुआ था। जिग्नेश ने उन्हें निवेश के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद वर्ष 2021 में इंदौर के नवलखा स्थित गणेश चैंबर कार्यालय में कई बैठकें हुईं, जहां निवेश से जुड़ा समझौता हुआ और एक करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
एक साल भुगतान के बाद बंद हुई मार्जिन मनी
शिकायत के अनुसार समझौते में दोनों कंपनियों की ओर से हर महीने डेढ़-डेढ़ लाख रुपये यानी कुल तीन लाख रुपये मार्जिन मनी देने की बात कही गई थी।
पीड़ित का आरोप है कि जुलाई 2022 तक भुगतान मिलता रहा, लेकिन इसके बाद अचानक राशि देना बंद कर दिया गया। कई बार संपर्क करने और भुगतान मांगने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।
ऑफिस पहुंचने पर धमकाने का आरोप
कमलेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि जब वह निवेश राशि और बकाया भुगतान मांगने इंदौर कार्यालय पहुंचे तो उन्हें कथित रूप से धमकाकर बाहर निकाल दिया गया।
उनका कहना है कि मूल निवेश के एक करोड़ रुपये अभी तक वापस नहीं मिले हैं। वहीं बकाया मार्जिन मनी जोड़ने पर कुल देनदारी करीब 1.14 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई
क्राइम ब्रांच ने शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच के आधार पर दोनों निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब वित्तीय लेनदेन, समझौते के दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

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