भोपाल। राजधानी भोपाल के अयोध्या नगर बायपास इलाके में आने वाले दिनों में सड़क का चेहरा ही नहीं, लाखों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी बदल सकती है। करीब 16 किलोमीटर लंबे 10 लेन मार्ग पर 18 व्हीकल अंडरपास बनाए जाने की योजना है। दावा है कि इससे आसपास रहने वाली करीब एक लाख की आबादी को सीधे आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसी परियोजना में एक रेल ओवर ब्रिज भी प्रस्तावित है।
यह सिर्फ सड़क चौड़ी करने का मामला नहीं है। असली चुनौती यह है कि चौड़ी सड़क स्थानीय बस्तियों को काटे नहीं, बल्कि जोड़े। अंडरपास इसी समस्या का समाधान माने जा रहे हैं। स्थानीय लोगों को मुख्य सड़क पार करने के लिए लंबा चक्कर लगाने और तेज रफ्तार यातायात के बीच जोखिम उठाने की जरूरत कम हो सकती है।
लेकिन बड़ी परियोजना के साथ बड़े सवाल भी खड़े होते हैं। 18 अंडरपास की लागत कितनी होगी? निर्माण कब तक पूरा होगा? जलभराव रोकने की क्या व्यवस्था होगी? गुणवत्ता की निगरानी कौन करेगा? और सबसे अहम—क्या निर्माण के दौरान आम लोगों को महीनों तक जाम और धूल की परेशानी झेलनी पड़ेगी?
भोपाल में सड़क परियोजनाओं का इतिहास बताता है कि घोषणा से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका समय पर और गुणवत्तापूर्ण निर्माण है। इसलिए इस बार जनता को सिर्फ 10 लेन सड़क नहीं, सुरक्षित रास्ता, बेहतर कनेक्टिविटी और तय समय में पूरा काम चाहिए।
अब निगाह परियोजना की घोषणा पर नहीं, जमीन पर उतरते काम और उसकी गुणवत्ता पर होगी।

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