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दूध से घी तक मिलावट का खेल, 11.73 लाख किलो खाद्य सामग्री जब्त

 


भोपाल। त्योहारों से पहले मध्य प्रदेश में खाद्य मिलावट के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान ने बाजार की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 जुलाई से 25 अगस्त तक चले अभियान में खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रदेशभर से 4,642 नमूने लिए और करीब 11.73 लाख किलोग्राम संदिग्ध खाद्य सामग्री, जिसकी अनुमानित कीमत 5.61 करोड़ रुपये बताई गई है, जब्त की।



सबसे चौंकाने वाला मामला घी को लेकर सामने आया। प्रयोगशाला में जांचे गए 680 नमूनों में 174 अमानक पाए गए। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत आठ जिलों में लिए गए घी के नमूनों में 25 ब्रांड असुरक्षित पाए गए। कई नमूनों में पाम ऑयल समेत अन्य मिलावट सामने आने की जानकारी है। भोपाल में नौ, इंदौर में सात और उज्जैन में तीन नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।


जांच में सामने आए ब्रांडों में रत्नागिरी, अनिक, जेबीएस ओरगी, गौसंत, हम्बल, नंद किशोर, नंद कृष्णा, एसआरएमआई मिल्क देसी घी, वास्तु के अलग-अलग उत्पाद, द्वारकेश, शगुन, दानेदार, भूमि, गोपी श्री, भूमि प्रीमियम प्योर, भूमि काऊ प्योर, अमृत, श्री सुधा प्रीमियम और श्रीमूल सहित अन्य नाम शामिल हैं।


कार्रवाई केवल घी तक सीमित नहीं रही। विभाग ने 10,835 किलो प्रतिबंधित एनालॉग पनीर भी जब्त किया। भोपाल में नागपुर से आया 166 किलो मिल्क केक भी जांच में अमानक मिला। अब सवाल यह है कि हजारों नमूनों में गड़बड़ी मिलने के बाद बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है? विभाग ने 18 लाइसेंस या पंजीयन रद्द किए और 172 नोटिस जारी किए हैं। असुरक्षित घी के निर्माताओं और विक्रेताओं पर न्यायालयीन कार्रवाई की तैयारी भी बताई गई है।


त्योहारों में उपभोक्ता क्या खा रहा है—शुद्ध घी या मिलावट का महंगा सौदा? यह सवाल अब खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने है।

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