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नाना-भरत से जुड़े कॉलोनाइजर से 10 घंटे सवाल-जवाब

ड्रग्स और सट्टे के बाद जमीन पर लौटी पुलिस की नजर, जीतू पटवारी के भाई से जुड़ी कारोबारी कड़ियां खंगालीं


प्रणव बजाज


ड्रग्स से शुरू हुई जांच अब ऑनलाइन सट्टेबाजी और जमीन के कारोबार तक पहुंच चुकी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी से जुड़ी जांच में पहले सुमित मंत्री और भरत पटवारी से पूछताछ हुई और अब पुलिस की नजर कॉलोनाइजर सुमित जैन पर है। पुलिस ने सुमित जैन को नोटिस देकर बुलाया और करीब 10 घंटे तक जमीन के सौदों, कंपनियों और कारोबारी लेन-देन को लेकर सवाल किए। रात करीब 11 बजे उसे रवाना किया गया।



जोन-1 के डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, पूछताछ में जमीन के कारोबार और पटवारी बंधुओं से जुड़े संभावित लेन-देन पर जानकारी ली गई। पुलिस यह जानना चाहती है कि किसानों से जमीन खरीदने के लिए सौदे किन शर्तों पर हुए, अनुबंध कब किए गए, भुगतान किस तरीके से हुआ और जमीन खरीदने के बाद उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।


कृष्णायन से वृंदावन प्राइम तक नजर


पूछताछ में सुमित जैन की फर्म कृष्णायन और वृंदावन प्राइम प्रोजेक्ट का भी संदर्भ सामने आया। पुलिस अब जमीन की खरीद से आगे बढ़कर यह देख रही है कि जमीन के बाद पूरा कारोबारी खेल कैसे चला। रजिस्ट्री, भुगतान, अनुबंध, आगे की खरीद-बिक्री और परियोजना से जुड़े दस्तावेज जांच के दायरे में हैं। नगर एवं ग्राम निवेश और रेरा से जुड़े कागजात भी जांचे जा सकते हैं।


सुमित मंत्री से भरत पटवारी तक खुली कड़ी


शुभम वैली मामले की जांच में पहले कॉलोनाइजर सुमित मंत्री से पूछताछ हुई। सामने आए दस्तावेजों में भरत पटवारी का सुमित मंत्री से जुड़ी एक कंपनी में पूर्व साझेदारी का उल्लेख सामने आया, जिसके बाद भरत से पूछताछ हुई।


शुभम वैली से जुड़े विवाद में संजय महाजन ने भी नाना पटवारी पर 11 लाख रुपये के सौदे से संबंधित आरोप लगाए थे। बाद में समझौते के नाम पर 20 लाख रुपये देने के कथित दबाव की शिकायत भी सामने आई। इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है।


ड्रग्स से सट्टे और अब जमीन तक


नाना पटवारी की जांच की शुरुआत कथित ड्रग्स नेटवर्क से हुई थी। बाद में पुलिस की पड़ताल में ऑनलाइन सट्टेबाजी की कड़ियां सामने आईं। मानव गंगवानी, संजय कौशल उर्फ रॉन, बंटी असनानी समेत कई नाम ऑनलाइन सट्टे की जांच में सामने आए। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया है और डिजिटल लेन-देन तथा अन्य कड़ियों की जांच जारी है।


अब जमीन के सौदों की जांच ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। फिलहाल पुलिस ने जीतू पटवारी को किसी मामले में आरोपी नहीं बनाया है, जबकि नाना और भरत की भूमिका को लेकर जांच अलग-अलग दस्तावेजों और लेन-देन के आधार पर आगे बढ़ रही है। सुमित जैन से लिए गए दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस जरूरत पड़ने पर उसे दोबारा पूछताछ के लिए बुला सकती है।


सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि जमीन किसने खरीदी। बड़ा सवाल यह है कि किसान से जमीन लेने के बाद वह जमीन किसके हाथों से गुजरती गई, पैसा कहां गया और उससे बने प्रोजेक्ट में किन लोगों की हिस्सेदारी रही?

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