नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बहुत कम समय में आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) प्रक्रिया के हाशिये से निकलकर उसके केंद्र में आ गया है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक विवादों के समाधान को तेज और अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके उपयोग में सावधानी और स्पष्ट मानकों की भी आवश्यकता है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि AI की सटीकता, प्रामाणिकता, पारदर्शिता और नैतिक उपयोग को लेकर जो चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार नहीं हैं। यदि बिना पर्याप्त मानवीय निगरानी के AI पर अत्यधिक निर्भरता बढ़ी, तो न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने आर्बिट्रेशन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत अदालतों के बाहर आपसी सहमति से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की व्यवस्था के रूप में हुई थी। समय के साथ यह व्यवस्था व्यापारिक और वाणिज्यिक विवादों के निपटारे का एक प्रभावी माध्यम बन गई और आज वैश्विक स्तर पर इसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य न्याय प्रणाली को मजबूत बनाना होना चाहिए, न कि मानवीय विवेक का स्थान लेना। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI का उपयोग न्यायिक और आर्बिट्रेशन प्रक्रियाओं में सहायक उपकरण के रूप में होना चाहिए, जबकि अंतिम निर्णय हमेशा प्रशिक्षित और स्वतंत्र मानवीय निर्णयकर्ता के हाथ में ही रहना चाहिए।

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