नई दिल्ली।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। बुधवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे फिसल गया। लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में बिकवाली देखी गई और मझोली तथा छोटी कंपनियों के सूचकांक भी दबाव में रहे।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब तीन प्रतिशत तक उछाल आया। भारत अपनी तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका पैदा करता है। यही कारण है कि निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी।
विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हो सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं, तो इसका असर रुपये, महंगाई, कॉर्पोरेट मुनाफे और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
अब निवेशकों की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और वैश्विक बाजारों के रुख पर टिकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं होता, तब तक भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

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