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मानसून पर टिकी ₹3 लाख करोड़ की किस्मत: बारिश बिगड़ी तो माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र पर बढ़ सकता है संकट

 

नई दिल्ली।

देश के माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र का लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का ऋण पोर्टफोलियो इस वर्ष मानसून और कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन पर काफी हद तक निर्भर माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र के करीब 80 प्रतिशत ऋण ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें लगभग 35 प्रतिशत कृषि, 9 प्रतिशत कृषि-आधारित उद्यमों और 20 प्रतिशत पशुपालन से संबंधित हैं।


बैंकों और वित्तीय संस्थानों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य रहता है और कृषि उत्पादन बेहतर होता है, तो किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ेगी, जिससे ऋण की समय पर अदायगी में सुधार आ सकता है। वहीं कमजोर बारिश, फसल नुकसान या प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में कर्ज चुकाने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाएगा।

हाल ही में जारी केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट में भी संकेत दिया गया है कि अधिकांश क्षेत्रों में ऋण गुणवत्ता में सुधार हुआ है, लेकिन कृषि क्षेत्र में यह सुधार अपेक्षाकृत धीमा रहा। इसी क्षेत्र में गैर-निष्पादित ऋण (एनपीएल) का स्तर अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक दर्ज किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद महत्वपूर्ण होंगे। मानसून, फसल उत्पादन, ग्रामीण आय और रोजगार की स्थिति तय करेगी कि इस क्षेत्र में ऋण वसूली कितनी मजबूत रहती है। यदि कृषि क्षेत्र में सुधार आता है तो माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत हो सकती है, जबकि प्रतिकूल परिस्थितियों में ऋण जोखिम और बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

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