आयाम बजाज (मुंबई)
महाराष्ट्र सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति राज्य में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करेगी और छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
सरकार की योजना है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर नागपुर में होने वाले शीतकालीन विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक पेश किया जाए। समिति विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन कर ऐसा मसौदा तैयार करेगी, जो संवैधानिक प्रावधानों और राज्य की सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप हो।
राज्य सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता और न्याय सुनिश्चित करना है। वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस पहल पर सवाल उठाते हुए व्यापक जनपरामर्श और सभी समुदायों की राय को शामिल करने की मांग की है।
यदि विधेयक शीतकालीन सत्र में पेश होता है, तो महाराष्ट्र समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाले राज्यों की सूची में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है। अब सभी की नजर समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

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