प्रयागराज। बाल विवाह से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि और के प्रावधान किसी भी पर्सनल लॉ, जिसमें शरिया की व्याख्या भी शामिल है, से ऊपर प्रभावी होंगे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत में विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु का पालन सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। यदि किसी लड़की की आयु 18 वर्ष से कम है, तो उससे जुड़ा विवाह और उसके बाद स्थापित शारीरिक संबंध पॉक्सो अधिनियम के दायरे में आ सकते हैं। इसलिए धार्मिक या व्यक्तिगत कानून का हवाला देकर बाल विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और पॉक्सो जैसे कानूनों का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की रक्षा करना है। संविधान और संसद द्वारा बनाए गए ऐसे कानूनों का पालन सभी समुदायों के लिए समान रूप से अनिवार्य है।
इस फैसले को बाल अधिकारों की सुरक्षा और कानून के समान अनुपालन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस निर्णय के कानूनी प्रभाव संबंधित मामले के तथ्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार लागू होंगे।

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