दतिया। मध्य प्रदेश की हाईप्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी तस्वीर साफ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है।
दतिया सीट पर होने वाला यह उपचुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल माना जा रहा है। भाजपा जहां अपने संगठन और सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी मैदान में उतर रही है, वहीं कांग्रेस स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं और पुराने राजनीतिक समीकरणों को लेकर मतदाताओं के बीच पहुंचने की तैयारी में है।
घनश्याम सिंह की वापसी पर कांग्रेस का भरोसा
कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाकर पुराने राजनीतिक अनुभव को महत्व दिया है। घनश्याम सिंह क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ को कांग्रेस अपनी ताकत मान रही है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके अनुभव और जनसंपर्क का फायदा चुनाव में मिलेगा।
भाजपा ने आशुतोष तिवारी पर लगाया दांव
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के सामने पार्टी के मजबूत संगठन और सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने की चुनौती होगी। भाजपा चुनाव में विकास कार्यों और संगठन की ताकत के साथ मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है।
30 जुलाई को मतदान, मुकाबला होगा रोचक
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा। चुनावी मैदान में दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के उतरने के बाद अब मुकाबला सीधा भाजपा और कांग्रेस के बीच दिखाई दे रहा है।
दतिया सीट पर स्थानीय मुद्दे, जातीय समीकरण, पुराने राजनीतिक संबंध और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकती है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बड़े नेताओं के दौरे और चुनाव प्रचार से मुकाबला और तेज होने की संभावना है।
दतिया का उपचुनाव केवल एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की सियासत में भाजपा और कांग्रेस के जनाधार की अग्निपरीक्षा भी माना जा रहा है।

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