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भारत-इंडोनेशिया का बड़ा आर्थिक दांव: रुपये-रुपिया में होगा कारोबार, डॉलर पर निर्भरता घटाने की तैयारी

 

नई दिल्ली।

 और ने द्विपक्षीय व्यापार और भुगतान प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन तथा सीमा-पार क्यूआर भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने पर सहमति जताई है। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और निवेश को सरल एवं कम लागत वाला बनाना है।


नई व्यवस्था लागू होने के बाद भारतीय पर्यटक इंडोनेशिया में स्थानीय क्यूआर भुगतान प्रणाली के माध्यम से सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। वहीं दोनों देशों के कारोबारी भारतीय रुपये और इंडोनेशियाई रुपिया में व्यापारिक भुगतान कर सकेंगे, जिससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होने की संभावना है।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय मुद्रा में व्यापार होने से विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत घटेगी, भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। इससे आयात-निर्यात करने वाली कंपनियों, विद्यार्थियों, पर्यटकों और निवेशकों के लिए लेनदेन अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसे अमेरिकी डॉलर की भूमिका समाप्त होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वैश्विक व्यापार और विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की प्रमुख भूमिका बनी हुई है। यह समझौता मुख्य रूप से भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय लेनदेन को अधिक सरल, किफायती और लचीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दोनों देशों के बीच यह पहल क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ डिजिटल भुगतान और स्थानीय मुद्रा आधारित व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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