नई दिल्ली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 30 प्रतिशत तक नीचे आ गई हैं। मुनाफावसूली, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ने और वैश्विक निवेशकों के सतर्क रुख के कारण पीली धातु पर दबाव बना हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखने के संकेत देते हैं, तो सोने जैसे ब्याज न देने वाले निवेश की मांग घट सकती है। इसके साथ ही हाल की तेज तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने से भी कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।
हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट स्थायी रुझान का संकेत नहीं है। यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है या प्रमुख केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों में कटौती करते हैं, तो सोने में दोबारा तेजी लौट सकती है।
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाएं। एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध निवेश करना जोखिम कम करने का बेहतर विकल्प माना जाता है। फिलहाल बाजार की दिशा अमेरिकी मौद्रिक नीति, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों पर काफी हद तक निर्भर रहेगी।

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