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मानसून में पेट दर्द, उल्टी और ऐंठन को न लें हल्के में, हो सकता है पेट का संक्रमण, जानें बचाव का सही तरीका

 

बरसात के मौसम में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और ऐंठन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सामान्य अपच नहीं बल्कि पेट का वायरल संक्रमण (जिसे आम बोलचाल में "स्टमक फ्लू" कहा जाता है) भी हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।


डॉक्टरों का कहना है कि यह संक्रमण आमतौर पर दूषित भोजन, गंदे पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में पेट में तेज दर्द, बार-बार उल्टी, दस्त, ऐंठन, बुखार, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी शामिल हैं। लगातार उल्टी-दस्त होने पर निर्जलीकरण का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बरसात के मौसम में केवल साफ और उबला या शुद्ध पानी पिएं। बाहर का कटा हुआ फल, बासी भोजन और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ खाने से बचें। भोजन से पहले और शौचालय के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोना संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

यदि उल्टी-दस्त के साथ तेज बुखार, मल में खून, लगातार पेट दर्द, चक्कर आना या शरीर में पानी की गंभीर कमी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेना उचित नहीं है, क्योंकि अधिकांश मामलों में यह संक्रमण वायरस के कारण होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में थोड़ी-सी सावधानी, स्वच्छ भोजन और सुरक्षित पेयजल अपनाकर पेट के संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय पर उपचार और पर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन मरीज को जल्दी स्वस्थ होने में मदद करता है।

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