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स्मार्ट मीटर बने 'शॉक मीटर'?

 

इंदौर में बढ़े बिजली बिलों से उपभोक्ताओं में आक्रोश, पूरे शहर में विरोध; रहवासी महासंघ ने एमडी को सौंपा ज्ञापन, उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग

इंदौर। शहर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद अचानक बढ़े बिजली बिलों को लेकर उपभोक्ताओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों से सामान्य खपत के बावजूद पहले की तुलना में कई गुना अधिक बिजली बिल आने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे नाराज रहवासी संगठनों ने इसे गंभीर जनहित का मुद्दा बताते हुए बिजली कंपनी के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।


रहवासी महासंघ का कहना है कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में उपभोक्ता शिकायत लेकर उनके पास पहुंचे हैं। अनेक परिवारों का दावा है कि उनके बिजली उपयोग में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई, फिर भी बिलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

महासंघ ने ज्ञापन में मांग की है कि जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां पुराने मीटरों के रिकॉर्ड और नए मीटरों की रीडिंग का तकनीकी मिलान कराया जाए। साथ ही स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति बनाकर यह जांच की जाए कि कहीं मीटरों की कार्यप्रणाली, सॉफ्टवेयर, रीडिंग प्रणाली या बिल तैयार करने की प्रक्रिया में कोई तकनीकी त्रुटि तो नहीं है।

रहवासियों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कई उपभोक्ताओं को संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। उनका आरोप है कि बिल जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि विवादित बिलों का समाधान समय पर नहीं हो रहा। कई उपभोक्ताओं ने यह भी मांग की कि जांच पूरी होने तक विवादित बिलों की वसूली और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

दूसरी ओर, बिजली कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं और रीडिंग स्वतः दर्ज होती है, जिससे मानवीय त्रुटि की संभावना कम हो जाती है। कंपनी का दावा है कि यदि किसी उपभोक्ता को बिल संबंधी शिकायत है तो उसका नियमानुसार परीक्षण किया जाएगा और तकनीकी जांच में यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और दक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर लागू होने के बाद यदि लगातार शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष तकनीकी जांच आवश्यक है। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा भी कायम रहेगा और यदि कहीं प्रणालीगत कमी है तो उसे समय रहते दूर किया जा सकेगा।

रहवासी महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि शिकायतों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ और तकनीकी जांच शुरू नहीं की गई, तो शहरभर में चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर बिजली कंपनी की अगली कार्रवाई और जांच संबंधी निर्णय पर टिकी हुई है।

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