संसद के 20 जुलाई से प्रस्तावित मानसून सत्र से पहले केंद्र की राजनीति में बड़े बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीसरी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल कर सकते हैं। हालांकि, केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस बार फेरबदल केवल मंत्रालयों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की कार्यशैली और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए कई नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है। वहीं कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन या अन्य जिम्मेदारियां सौंपे जाने की भी चर्चा है।
सूत्रों के हवाले से जिन नामों को लेकर सबसे अधिक अटकलें हैं, उनमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा शामिल हैं। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व सरकार में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और क्षेत्रीय तथा सामाजिक संतुलन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जबकि विभिन्न राज्यों और हाल के वर्षों में एनडीए से जुड़े नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वित्त मंत्रालय को लेकर भी कई तरह की अटकलें हैं। राजनीतिक चर्चाओं में शक्तिकांत दास और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नाम संभावित विकल्पों के रूप में लिए जा रहे हैं, लेकिन इस पर भी कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी चर्चा है कि यदि उनके विभाग में बदलाव होता है तो उन्हें कोई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा जा सकता है।
उधर, अनुराग ठाकुर की मंत्रिमंडल में वापसी की संभावना भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसके अलावा पंजाब, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत से कुछ नए चेहरों को शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये सभी चर्चाएं राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। सरकार या भाजपा की ओर से जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक संभावित फेरबदल, मंत्रियों के नाम और नई नियुक्तियों को केवल अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यदि यह फेरबदल होता है, तो इसे मोदी सरकार 3.0 का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव माना जाएगा।

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