Top News

हवाई खर्च या खजाने पर वार?

 

मुख्यमंत्री से लेकर वीवीआईपी उड़ानों तक करोड़ों का बोझ ?

प्रणव बजाज

कर्जदार मध्यप्रदेश का एक और घोटाला !

290 करोड़ चार्टर उड़ानों पर खर्च, 405 करोड़ के नए विमान-हेलीकॉप्टर की खरीद और अब 4 लाख की पोस्ट पर 29 लाख तक का मासिक भुगतान! आखिर किसके लिए उड़ रहा है जनता का पैसा


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार की विमानन व्यवस्था अब गंभीर सवालों के घेरे में है। सरकारी दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, जहां एक ओर सरकार लगभग 235 करोड़ रुपये का बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 बिजनेस जेट और करीब 170 करोड़ रुपये का आधुनिक हेलीकॉप्टर खरीद रही है, वहीं दूसरी ओर पायलट एवं तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती में सरकारी वेतनमान की तुलना में कई गुना अधिक भुगतान का मामला सामने आया है।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पायलट इन कमांड (PIC) जैसे पद पर, जहां सरकार सीधे नियुक्ति कर लगभग 4 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च कर सकती है, वहीं निजी एजेंसी के माध्यम से उसी पद पर वेतन, जीएसटी, सेवा शुल्क और अन्य मदों को जोड़कर 27 से 29 लाख रुपये प्रतिमाह तक का खर्च होने का दावा किया जा रहा है। यही नहीं, को-पायलट, फ्लाइट ऑपरेशन मैनेजर, डिस्पैचर सहित अन्य तकनीकी पदों पर भी सरकारी वेतनमान से कई गुना अधिक भुगतान निर्धारित होने की बात सामने आई है।

मामला केवल भर्ती तक सीमित नहीं है। विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच चार्टर विमान और हेलीकॉप्टर पर लगभग 290 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इन उड़ानों का उपयोग मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्रिपरिषद के सदस्य, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा अन्य अधिकृत वीवीआईपी सरकारी यात्राओं के लिए किया जाता है।

अब सरकार अपना नया विमानन बेड़ा तैयार कर रही है। अगस्त 2026 में नया बिजनेस जेट मिलने की संभावना है, जबकि आधुनिक हेलीकॉप्टर भी बेड़े में शामिल किया जाएगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार अपना स्थायी विमानन ढांचा खड़ा कर रही है, तब संचालन के लिए निजी एजेंसियों पर इतनी महंगी निर्भरता क्यों बनाई जा रही है?

बताया जाता है कि विमान खरीद प्रक्रिया लगभग दो वर्षों तक चली। इस दौरान लागत में भी बदलाव हुआ और अंततः कैबिनेट ने खरीद को मंजूरी दी। लेकिन अब भर्ती प्रक्रिया और उससे जुड़े खर्चों ने पूरी व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनता के सवाल

4 लाख की सरकारी पोस्ट पर 27–29 लाख रुपये प्रतिमाह तक का खर्च क्यों?

निजी एजेंसी का चयन किन शर्तों पर किया गया?

भर्ती और भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है या नहीं?

क्या सरकारी विमानन सेवा को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय महंगी आउटसोर्स व्यवस्था अपनाई जा रही है?

करदाताओं के पैसे का सबसे किफायती उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?

यदि सरकार का पूरा निर्णय नियमों के अनुरूप और वित्तीय दृष्टि से उचित है, तो भर्ती प्रक्रिया, अनुबंध, भुगतान संरचना और चयन के आधार को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि करोड़ों रुपये के इस खर्च पर उठ रहे सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सके।

Post a Comment

Previous Post Next Post