उज्जैन संवाददाता
शहर की बाहरी कॉलोनियों में रहने वाले हजारों नागरिक बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। मानसून की बारिश ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। कहीं महीनों से स्ट्रीट लाइट बंद हैं, कहीं अधूरे नालों ने जलभराव की समस्या खड़ी कर दी है, तो कहीं कीचड़ से सड़कें लोगों के लिए मुसीबत बन गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा। कई नागरिकों का आरोप है कि वे खुलकर अपनी बात रखने से भी हिचकिचाते हैं, क्योंकि उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार पर विपक्ष और स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जब विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तब शहर की बाहरी कॉलोनियां आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों तरस रही हैं? अधूरे नाले, बंद स्ट्रीट लाइटें, जलभराव और अतिक्रमण आखिर किसकी जवाबदेही है?
अब नागरिकों की मांग है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं इन क्षेत्रों का निरीक्षण करें और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। लोगों का कहना है कि उन्हें घोषणाएं नहीं, जमीन पर काम चाहिए।

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