नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित सावन माह की शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और अक्षत अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सावन की शिवरात्रि पर की गई आराधना का फल विशेष रूप से शुभ होता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव को सावन माह अत्यंत प्रिय है। एक मान्यता यह भी है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने के बाद देवताओं ने सावन मास में भगवान शिव का जलाभिषेक कर उन्हें शीतलता प्रदान की थी। तभी से इस महीने में शिव पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।
धर्माचार्यों के अनुसार श्रद्धालुओं को ब्रह्म मुहूर्त या प्रदोष काल में स्नान कर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप, शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख, परिवार में शांति तथा जीवन की बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि ये मान्यताएं धार्मिक आस्था पर आधारित हैं।

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