देश में होने वाली हर मौत का सही कारण दर्ज होना केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव भी है। इसी उद्देश्य से मेडिकल सर्टिफिकेट ऑफ कॉज ऑफ डेथ (एमसीसीडी) जारी किया जाता है। वर्ष 2024 में भारत में 20.66 लाख मौतों का एमसीसीडी जारी किया गया, जिनमें सबसे अधिक 3,27,174 मामले महाराष्ट्र से दर्ज हुए। एमसीसीडी में चिकित्सक मृत्यु का वास्तविक कारण दर्ज करते हैं। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किन बीमारियों से सबसे अधिक मौतें हो रही हैं और किन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। इसी आधार पर हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, संक्रमण और सड़क दुर्घटनाओं जैसी समस्याओं के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मृत्यु के कारणों का रिकॉर्ड सटीक होगा तो बीमारियों की समय पर पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और प्रभावी रोकथाम संभव होगी। इससे भविष्य में लाखों लोगों की जान बचाने वाली नीतियां तैयार की जा सकती हैं। भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून के तहत चिकित्सकीय कारण दर्ज करने की व्यवस्था भी इसी उद्देश्य से लागू की गई है।

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