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रील्स और लूडो में उलझ रहे बुजुर्ग: मनोरंजन कब बन जाता है लत, जानिए दिमाग और सेहत पर असर

 

नई दिल्ली।

स्मार्टफोन अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं रह गया है। बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी घंटों तक लूडो जैसे ऑनलाइन खेल, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया पर समय बिता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित उपयोग मानसिक सक्रियता और मनोरंजन के लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन अत्यधिक उपयोग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।


विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव, गर्दन और कमर में दर्द, नींद की गुणवत्ता में कमी और शारीरिक गतिविधियां घटने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लगातार शॉर्ट वीडियो देखने की आदत ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है और व्यक्ति वास्तविक सामाजिक मेलजोल से दूर होने लगता है।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अकेलापन, परिवार के साथ कम समय और डिजिटल मनोरंजन की आसान उपलब्धता के कारण कई बुजुर्ग धीरे-धीरे स्मार्टफोन पर अधिक निर्भर हो जाते हैं। यदि मोबाइल का उपयोग दैनिक दिनचर्या, भोजन, नींद या पारिवारिक संबंधों को प्रभावित करने लगे, तो यह डिजिटल लत का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बुजुर्गों के लिए स्क्रीन समय सीमित रखा जाए, नियमित सैर, योग, पुस्तक पढ़ने, सामाजिक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने को प्राथमिकता दी जाए। यदि मोबाइल की लत के कारण व्यवहार, याददाश्त या मानसिक स्वास्थ्य में स्पष्ट बदलाव दिखाई दें, तो मनोवैज्ञानिक या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहेगा।

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