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दवाओं से नहीं रुक रहे बच्चे के दौरे? हो सकती है ड्रग-रेजिस्टेंट मिर्गी, समय पर पहचान है जरूरी

 

नई दिल्ली। मिर्गी से पीड़ित अधिकांश बच्चों में दवाओं से दौरे नियंत्रित हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में लगातार उपचार के बावजूद दौरे आते रहते हैं। विशेषज्ञ इस स्थिति को ड्रग-रेजिस्टेंट मिर्गी कहते हैं। ऐसे मामलों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल सकता है।



विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दो उपयुक्त मिर्गी-रोधी दवाओं का पर्याप्त समय तक उपयोग करने के बाद भी दौरे बंद नहीं होते, तो बच्चे का विस्तृत परीक्षण कराना चाहिए। इसके लिए बाल तंत्रिका रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ईईजी, वीडियो ईईजी, एमआरआई जैसी जांच कराई जाती है, ताकि बीमारी का सही कारण पता चल सके।


डॉक्टरों का कहना है कि माता-पिता बिना सलाह के दवा बंद न करें और न ही उसकी मात्रा बदलें। कई मामलों में दवाओं के अलावा मिर्गी की शल्य चिकित्सा, वेगस नर्व स्टिमुलेशन (वीएनएस) या कीटोजेनिक आहार जैसे उपचार भी प्रभावी साबित होते हैं। सही समय पर इलाज शुरू होने से बच्चों में दौरों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर उपचार ही ड्रग-रेजिस्टेंट मिर्गी से पीड़ित बच्चों के बेहतर भविष्य की कुंजी है। यदि बच्चे को बार-बार दौरे पड़ रहे हों, तो देर किए बिना विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

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