महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर दुष्कर्म के आरोप से मचा विवाद, जांच के घेरे में पुलिस की भूमिका भी

 


शैलेंद्र कुशवाहा उज्जैन


उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित दत्त अखाड़ा आश्रम से जुड़े महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर एक महिला ने दुष्कर्म, मारपीट, धमकी और ब्लैकमेल जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि शिकायत देने के लगभग 10 दिन बाद भी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की, जिसके बाद उसने गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक (DGP), पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित शिकायत भेजी। मामला सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। 



महिला के आरोप क्या हैं?


शिकायत के अनुसार महिला का दावा है कि उसकी पहचान लगभग डेढ़ वर्ष पहले आश्रम में हुई थी। वह आश्रम की गतिविधियों से जुड़ी रही। महिला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 की गुरु पूर्णिमा के दौरान उसके साथ नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि घटना का वीडियो बनाया गया, बाद में उसी के आधार पर धमकी दी गई तथा उसके साथ मारपीट भी की गई। 


महामंडलेश्वर का पक्

महामंडलेश्वर ज्ञानदास ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि महिला पिछले लगभग एक वर्ष से उन्हें ब्लैकमेल कर रही है और यह उन्हें बदनाम करने की सुनियोजित साजिश है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने महिला के विरुद्ध भी ब्लैकमेल की शिकायत किए जाने की बात कही है। 


पुलिस पर उठे सवा

मामले में सबसे बड़ा प्रश्न पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। महिला का आरोप है कि शिकायत दिए जाने के कई दिन बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। यदि यह दावा सही है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। 

कानूनी स्थिति

यह मामला फिलहाल आरोप और प्रत्यारोप के स्तर पर है। आरोप गंभीर हैं, लेकिन उनकी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष मानना इस समय उचित नहीं होगा। निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों का परीक्षण और कानून के अनुसार कार्रवाई ही इस मामले का अंतिम आधार होगी।

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