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तबादलों पर सत्ता में संग्राम! मंत्री बनाम सचिव, मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत

 

प्रणव बजाज

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार में तबादलों को लेकर उठा विवाद अब सत्ता के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है। सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने अपने ही विभाग के प्रमुख सचिव जॉन किंग्सली पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भेजी है। मंत्री का आरोप है कि तबादला प्रक्रिया में उनकी अनुशंसाओं की अनदेखी की गई और केवल चुनिंदा अधिकारियों-कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आदेश जारी किए गए।


मंत्री के अनुसार, विभागीय बैठक में जिन नामों पर सहमति बनी थी, अंतिम सूची में वे शामिल नहीं किए गए। उनका कहना है कि उनके अलावा तीन विधायकों की सिफारिशों को भी नजरअंदाज किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि तबादलों के दौरान मनमानी की गई और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। मंत्री ने अपने पत्र के साथ एक कथित बातचीत का उल्लेख भी किया है, जिसमें लेन-देन से जुड़े आरोप सामने आने का दावा किया गया है।

दूसरी ओर प्रमुख सचिव जॉन किंग्सली ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मंत्री के साथ हुई बैठक में कुछ प्रस्तावित नामों पर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में जो सूची आई उसमें अलग नाम शामिल थे। उनका कहना है कि इसी कारण उन्होंने सूची को रोक दिया। कथित लेन-देन के आरोपों को भी उन्होंने निराधार बताया और कहा कि संबंधित मामले में पहले से सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज है।

मामला मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंचने के बाद शासन स्तर पर गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है। प्रमुख सचिव से पूरे घटनाक्रम पर लिखित जवाब मांगा गया है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि तबादला सूची किस स्तर पर बदली गई, किसके निर्देश पर संशोधन हुआ और क्या प्रक्रिया का पालन किया गया।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में तबादलों का दौर लगभग समाप्त हो चुका है। ऐसे में मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के बीच खुला टकराव सरकार की कार्यप्रणाली और तबादला व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जांच के निष्कर्ष तय करेंगे कि आरोपों में कितना दम है और क्या प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी।

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