नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाएंगे। इस ऐतिहासिक पहल के साथ भारतीय रेलवे स्वच्छ, हरित और भविष्य की ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम रखेगा।
हाइड्रोजन रेल पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल मानी जाती है। इसमें ईंधन सेल तकनीक का उपयोग होता है, जिससे बिजली का उत्पादन होता है और उत्सर्जन के रूप में मुख्यतः केवल जलवाष्प निकलती है। इससे कार्बन उत्सर्जन और ध्नि प्रदूषण दोनों में कमी आएगी।
रेलवे का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से ऐसे मार्गों पर हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों का संचालन बढ़ाना है, जहां डीजल इंजनों का अधिक उपयोग होता है। यह परियोजना देश को हरित ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आधुनिक रेल तकनीक की दिशा में आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में भारतीय रेलवे के कई गैर-विद्युतीकृत या कम यातायात वाले मार्गों पर भी हाइड्रोजन रेल का संचालन किया जा सकता है। यह पहल भारत के स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी गति देगी।

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