इंदौर-उज्जैन मार्ग पर एक बार फिर गोलू शुक्ला से जुड़ी बस हादसे के बाद विवादों में है। ताजा घटना में तेज रफ्तार बस की चपेट में आने से दो गायों की मौत हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने बस में आग लगा दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह घटना अकेली नहीं है। पिछले एक वर्ष में गोलू शुक्ला के नाम से संचालित बसों को लेकर लगातार गंभीर हादसे सामने आए हैं। सबसे चर्चित हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद बसों की रफ्तार और संचालन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद एक अन्य घटना में बस ने बाइक सवारों को टक्कर मार दी, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। अब तीसरी बड़ी घटना में दो गायों की मौत और बस में आगजनी ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि लगातार हादसे हो रहे हैं, तो परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां है? क्या बार-बार दुर्घटनाओं के बावजूद बसों के संचालन, चालकों की कार्यशैली और सुरक्षा मानकों की प्रभावी जांच हुई? क्या जिम्मेदारी केवल चालक तक सीमित रहेगी या पूरे संचालन तंत्र की जवाबदेही भी तय होगी?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इंदौर-उज्जैन मार्ग पर तेज रफ्तार बसें लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई हैं। लगातार हो रहे हादसों के बाद अब मांग उठ रही है कि सभी निजी बसों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।
(संपादकीय टिप्पणी)
यदि एक ही बस समूह का नाम बार-बार दुर्घटनाओं में सामने आ रहा है, तो यह केवल संयोग है या व्यवस्था की गंभीर विफलता—इसका जवाब निष्पक्ष जांच ही दे सकती है। जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं मानी जा सकती।

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