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देश में पहली बार वंदे भारत बनी 'ग्रीन कॉरिडोर' की जीवनरेखा, ढाई घंटे में पहुंचाया जीवित हृदय

विशेष संवाददाता


भारत में पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस का उपयोग एक जीवित मानव हृदय (हार्ट) को समय पर प्रत्यारोपण केंद्र तक पहुंचाने के लिए किया गया। इस विशेष अभियान में रेलवे, डॉक्टरों, पुलिस और प्रशासन के समन्वय से लगभग ढाई घंटे के भीतर हार्ट को सुरक्षित पहुंचाया गया, जिससे मरीज को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद बनी।


क्या था पूरा मिशन?


अंग प्रत्यारोपण में "गोल्डन टाइम" सबसे महत्वपूर्ण होता है। हृदय को दानदाता से निकालने के बाद सीमित समय के भीतर प्रत्यारोपण केंद्र पहुंचाना आवश्यक होता है। इसी चुनौती को देखते हुए रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने वंदे भारत ट्रेन के जरिए विशेष व्यवस्था बनाई।


कैसे हुआ ऑपरेशन?


दानदाता अस्पताल से हार्ट को विशेष चिकित्सा बॉक्स में सुरक्षित रखा गया।


पुलिस ने सड़क मार्ग पर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अस्पताल से रेलवे स्टेशन तक बिना रुकावट पहुंचाया।


वंदे भारत एक्सप्रेस में मेडिकल टीम के साथ हार्ट को निर्धारित गंतव्य तक ले जाया गया।


स्टेशन से फिर ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से प्रत्यारोपण अस्पताल पहुंचाकर ऑपरेशन शुरू किया गया।



क्यों चुनी गई वंदे भारत?


उच्च गति और समय की सटीकता।


कम यात्रा समय।


सुरक्षित एवं निर्बाध परिवहन।


लंबी दूरी पर सड़क की तुलना में अधिक विश्वसनीय विकल्प।



चिकित्सा क्षेत्र के लिए नई मिसाल


विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन भविष्य में अंग प्रत्यारोपण के लिए रेलवे के उपयोग की नई संभावनाएं खोल सकता है। अब तक ऐसे अधिकांश अभियान हवाई मार्ग या एम्बुलेंस के जरिए संचालित किए जाते रहे हैं।


बड़ी तस्वीर


भारत में हर वर्ष हजारों मरीज हृदय, लिवर, किडनी और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं। समय पर अंग पहुंचाने की व्यवस्था जितनी मजबूत होगी, उतनी ही अधिक जिंदगियां बचाई जा सकेंगी। वंदे भारत के जरिए सफलतापूर्वक पूरा हुआ यह अभियान देश की स्वास्थ्य और परिवहन व्यवस्था के बेहतर समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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