नई दिल्ली। यदि आप बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन करते हैं, तो सावधान हो जाइए। आयकर कानून में नकद भुगतान, नकद प्राप्ति, संपत्ति खरीद-बिक्री और ऋण संबंधी कई सख्त प्रावधान हैं। निर्धारित सीमा से अधिक नकद लेन-देन करने पर भारी जुर्माना, आयकर जांच और अन्य कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक करदाता के लिए इन नियमों की जानकारी आवश्यक है।
आयकर से जुड़े 8 महत्वपूर्ण नियम:
एक दिन में 2 लाख रुपये या उससे अधिक नकद प्राप्त करना प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन होने पर प्राप्त राशि के बराबर तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
व्यवसाय में 10 हजार रुपये से अधिक का नकद खर्च सामान्यतः कर लाभ के लिए स्वीकार नहीं किया जाता।
अचल संपत्ति के लेन-देन में 20 हजार रुपये या उससे अधिक का अग्रिम या अन्य राशि नकद लेने-देने पर प्रतिबंध है।
20 हजार रुपये या उससे अधिक का ऋण या जमा राशि नकद लेना या लौटाना नियमों के विरुद्ध हो सकता है।
50 हजार रुपये या उससे अधिक के बैंकिंग लेन-देन में पहचान संबंधी दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है।
उच्च मूल्य के नकद लेन-देन की जानकारी बैंक और अन्य संस्थाएं आयकर विभाग को उपलब्ध करा सकती हैं।
व्यवसायियों को निर्धारित सीमा से अधिक नकद लेन-देन का सही लेखा-जोखा रखना आवश्यक है।
डिजिटल भुगतान और बैंकिंग माध्यमों का उपयोग कर रिकॉर्ड सुरक्षित रखना भविष्य में कर संबंधी विवादों से बचाता है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश बड़े भुगतान बैंक, चेक, डिमांड ड्राफ्ट या अन्य डिजिटल माध्यमों से करना अधिक सुरक्षित और पारदर्शी रहता है। किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले कर सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट से परामर्श लेना उचित है, ताकि अनजाने में नियमों का उल्लंघन न हो और अनावश्यक जुर्माने से बचा जा सके।

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