नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कम होने के साथ ही वैश्विक कच्चे तेल बाजार को बड़ी राहत मिली है। संघर्ष शांत पड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
पिछले सप्ताह तनाव चरम पर पहुंचने के दौरान कच्चे तेल की कीमतें वर्ष 2026 में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई थीं। इसकी प्रमुख वजह यह थी कि संघर्ष का असर लाल सागर क्षेत्र तक पहुंच गया था, जिससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्ते सऊदी अरब से एशियाई देशों को होने वाले तेल निर्यात पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी।
हालात सामान्य होने और आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम होने के बाद वैश्विक बाजार में निवेशकों की चिंता घटी, जिसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है और तेल आपूर्ति सामान्य रहती है, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। इसका सकारात्मक असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें कम रहने से पेट्रोल-डीजल की लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर भी राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

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