प्रणव बजाज
दतिया विधानसभा उपचुनाव ने भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई का रूप ले लिया है। पार्टी ने चुनाव प्रचार के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई वरिष्ठ नेताओं को उतारा गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भी सूची में शामिल है, हालांकि उन्हें 16वें स्थान पर रखा गया है।
इतने बड़े चुनावी अभियान के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा के लिए दतिया की राह वास्तव में आसान है? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव केवल विपक्ष से मुकाबला नहीं, बल्कि भाजपा के लिए अपनी संगठनात्मक एकजुटता साबित करने की भी परीक्षा है। टिकट वितरण के बाद नरोत्तम मिश्रा समर्थकों की नाराज़गी खुलकर सामने आई थी। विरोध प्रदर्शन और तनाव के बाद अब पार्टी नेतृत्व ने उन्हें प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका देकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है।
भाजपा की रणनीति साफ है—स्थानीय समीकरणों को बड़े चेहरों की लोकप्रियता और संगठन की ताकत से साधना। वहीं कांग्रेस भी इसे सत्ता के खिलाफ जनमत का अवसर बताकर चुनाव को स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित करने की कोशिश कर रही है। दोनों दलों के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
दतिया का यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके नतीजे से यह संदेश जाएगा कि भाजपा अभी भी अपने मजबूत गढ़ों में पूरी तरह संगठित है या स्थानीय असंतोष चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। 40 स्टार प्रचारकों की मौजूदगी चुनाव को हाई-प्रोफाइल जरूर बना रही है, लेकिन अंतिम फैसला दतिया की जनता के मतदान से ही होगा। अभी किसी भी दल की जीत तय मानना जल्दबाज़ी होगी।

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