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वीवीआईपी कोटे का काला कारोबार बेनकाब! 200 एजेंटों के नेटवर्क से 400 से ज्यादा रेल टिकट फर्जी तरीके से हुए कन्फर्म

परिक्षित गुप्ता | मुंबई



मुंबई पुलिस ने भारतीय रेलवे के वीवीआईपी (विशिष्ट अतिथि) कोटे का कथित दुरुपयोग करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच के अनुसार, यह नेटवर्क पिछले तीन-चार वर्षों से सक्रिय था और देशभर में करीब 200 एजेंटों के माध्यम से यात्रियों के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 400 से अधिक रेल टिकट वीवीआईपी कोटे से कन्फर्म कराए गए।


मालाबार हिल पुलिस ने इस मामले में कपड़ा व्यापारी अमरीश ईश्वरलाल ठक्कर, उसके भाई सागर ठक्कर सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपों की जांच जारी है।


ऐसे चलता था पूरा खेल


पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह जरूरतमंद यात्रियों से संपर्क करता था और मोटी रकम लेकर वीवीआईपी कोटे से टिकट दिलाने का भरोसा देता था। इसके लिए राज्यपाल के एडीसी, मंत्रियों, वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों और अन्य उच्च पदाधिकारियों के नाम से कथित रूप से फर्जी लेटरहेड, जाली मुहर और हस्ताक्षर तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर टिकट कन्फर्म कराने के आवेदन भेजे जाते थे।


रेलवे की जांच से खुला राज


मामले का खुलासा तब हुआ जब रेलवे अधिकारियों ने कुछ संदिग्ध वीवीआईपी कोटा आवेदनों का सत्यापन कराया। जांच में पाया गया कि प्रस्तुत लेटरहेड और हस्ताक्षर असली नहीं थे। इसके बाद शिकायत दर्ज हुई और पुलिस ने जांच शुरू कर पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई।


पहले भी दर्ज हैं मामले


पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अमरीश ठक्कर के खिलाफ पहले भी फर्जी रेलवे लेटरहेड का इस्तेमाल कर टिकट कन्फर्म कराने से जुड़े मामले दर्ज हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क को किसी सरकारी कर्मचारी या रेलवे कर्मी की अंदरूनी मदद मिल रही थी।


छापे में क्या मिला?


पुलिस ने आरोपियों के पास से:


12 मोबाइल फोन


16 सिम कार्ड


70 से अधिक क्रेडिट और डेबिट कार्ड


400 से अधिक यात्रियों का डेटा



बरामद किया है। इन सामग्रियों की फोरेंसिक जांच की जा रही है।


बड़ा सवाल


यदि जांच में यह साबित होता है कि सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी कर वीवीआईपी कोटे का व्यवस्थित दुरुपयोग किया गया, तो यह केवल धोखाधड़ी का मामला नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था और आम यात्रियों के अधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।


नोट: यह मामला अभी जांच के अधीन है। आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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