टेंडर की शर्तों में 90% कॉम्पेक्शन अनिवार्य, सवाल- अगर हुआ तो सड़कें क्यों बैठ रहीं? अगर नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर?
विशेष संवाददाता | बौद्धिक प्रतिकार
शहर में सीवर लाइन परियोजना के बाद हुए रिस्टोरेशन कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बौद्धिक प्रतिकार के पास उपलब्ध निविदा दस्तावेज़ के अनुसार बैकफिलिंग के दौरान हर 15 सेंटीमीटर की परत पर वाटरिंग और कॉम्पेक्शन करना अनिवार्य था तथा पूरी भराई को कम से कम 90 प्रतिशत डेंसिटी तक दबाना आवश्यक था। इसके बावजूद शहर के अनेक हिस्सों में सड़कें धंसने, गड्ढे बनने और बार-बार मरम्मत की नौबत आने से पूरे काम की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
दस्तावेज़ में साफ लिखा है कि पाइप लाइन के ऊपर की बैकफिलिंग 15-15 सेंटीमीटर की परतों में होगी और प्रत्येक परत को उचित रूप से पानी देकर कॉम्पैक्ट किया जाएगा। यदि यह प्रक्रिया मौके पर नहीं अपनाई गई, तो विशेषज्ञों के अनुसार कुछ समय बाद सड़क का बैठना स्वाभाविक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि तकनीकी मानकों का पालन नहीं हुआ तो कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र किसने जारी किया? गुणवत्ता परीक्षण किसने किया? भुगतान किस अधिकारी की स्वीकृति से हुआ? और यदि सभी परीक्षण हुए थे, तो उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
नगर निगम की किसी भी ऐसी परियोजना में गुणवत्ता की जिम्मेदारी केवल ठेकेदार की नहीं होती। कार्य की निगरानी और स्वीकृति की जिम्मेदारी संबंधित नगर निगम आयुक्त, मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री, उपयंत्री, गुणवत्ता नियंत्रण शाखा तथा परियोजना की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच का विषय बन सकती है। किस अधिकारी ने किस स्तर पर कार्य का निरीक्षण किया और भुगतान से पहले तकनीकी शर्तों का सत्यापन किया, यह जांच से स्पष्ट होना चाहिए।
यदि कॉम्पेक्शन और वाटरिंग नहीं हुई, तो इससे ठेकेदार का खर्च बचा होगा, जबकि नुकसान शहर और करदाताओं को उठाना पड़ा। ऐसे में यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
जांच में इन दस्तावेज़ों की होनी चाहिए पड़ताल
कार्य आदेश और अनुबंध।
मापन पुस्तिका (एमबी)।
कॉम्पेक्शन एवं फील्ड डेंसिटी टेस्ट रिपोर्ट।
भुगतान स्वीकृति फाइल।
गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षण रिपोर्ट।
कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र।
जनता पूछ रही है पाँच सवाल
हर 15 सेंटीमीटर पर कॉम्पेक्शन हुआ या नहीं?
90 प्रतिशत डेंसिटी की परीक्षण रिपोर्ट कहां है?
सड़कें धंसने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
गुणवत्ता प्रमाणित करने वाले अधिकारी कौन थे?
करोड़ों रुपये का भुगतान किन आधारों पर जारी किया गया?
बौद्धिक प्रतिकार की मांग
पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच, सभी गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं, दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो तथा जनता के पैसे से बनी सड़कों की गुणवत्ता का सामाजिक ऑडिट कराया जाए।
(संपादकीय टिप्पणी: यह रिपोर्ट उपलब्ध टेंडर दस्तावेज़ों और तकनीकी शर्तों के आधार पर सार्वजनिक हित में उठाए गए प्रश्न प्रस्तुत करती है। किसी व्यक्ति या अधिकारी की जिम्मेदारी सक्षम जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जा सकती है।)

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