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एंटी-पेपर लीक बिल लोकसभा में पेश: छह महीने में फैसला, 10 साल तक जेल और एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव

 


नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं को लेकर उठे व्यापक विरोध के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश कर दिया। सरकार का दावा है कि नया कानून पेपर लीक माफिया पर अब तक की सबसे कड़ी कानूनी कार्रवाई का आधार बनेगा। 



विधेयक में संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों, उनके सहयोगियों और इसमें शामिल संस्थाओं के खिलाफ सख्त दंड का प्रस्ताव है। गंभीर मामलों में 5 से 10 वर्ष तक के कारावास और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। कुछ मामलों में सेवा प्रदाताओं और संस्थाओं पर इससे भी अधिक आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है। 


सबसे बड़ा बदलाव: तय समय में जांच और फैसला


सरकार ने विधेयक में समयबद्ध न्याय व्यवस्था पर विशेष जोर दिया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार—


पेपर लीक के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।


राज्यों में फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।


सरकार का लक्ष्य है कि मुकदमों का निपटारा करीब छह महीने के भीतर हो सके, ताकि वर्षों तक मामले लंबित न रहें। 



किन पर होगी कार्रवाई?


विधेयक केवल प्रश्नपत्र लीक करने वालों तक सीमित नहीं है। इसमें उन सभी लोगों और संस्थाओं को दायरे में लाने का प्रस्ताव है जो—


प्रश्नपत्र लीक कराने की साजिश में शामिल हों।


संगठित गिरोह का हिस्सा हों।


परीक्षा संचालन में तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत करें।


अनुचित लाभ के लिए परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करें। 



सरकार का तर्क


सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का विश्वास कमजोर किया है। नया कानून परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने, संगठित अपराध पर रोक लगाने और दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने के उद्देश्य से लाया गया है। 


विपक्ष की आपत्ति


विपक्ष ने विधेयक पेश किए जाने के दौरान भी सरकार को घेरा। विपक्षी दलों का कहना है कि केवल कठोर कानून बना देने से समस्या समाप्त नहीं होगी। उनका तर्क है कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थागत जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है। 


प्रमुख प्रावधान एक नजर में


5 से 10 वर्ष तक कारावास (संगठित पेपर लीक मामलों में)


कम से कम ₹1 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान


दो महीने में जांच पूरी करने का लक्ष्य


फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना


परीक्षा माफिया, सहयोगियों और संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई


समयबद्ध सुनवाई के जरिए छात्रों को शीघ्र न्याय दिलाने पर जोर

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