देश के प्रमुख अंतरिक्ष संस्थान इसरो से पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अंतरिक्ष विभाग ने विशेष रूप से गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफों को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत अब रणनीतिक परियोजनाओं पर कार्यरत वैज्ञानिकों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसे मामलों की उच्च स्तर पर समीक्षा होगी। इसके साथ ही, वर्ष 2020 में दी गई कुछ विकेंद्रीकृत स्वीकृति संबंधी व्यवस्थाओं को वापस लेते हुए निर्णय प्रक्रिया को अधिक केंद्रीकृत किया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान, उपग्रह प्रक्षेपण कार्यक्रमों और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों की समय-सीमा तथा तकनीकी क्षमता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। हालांकि, इसरो नेतृत्व ने भरोसा दिलाया है कि मौजूदा परियोजनाओं की प्रगति पर इन इस्तीफों का असर नहीं पड़ेगा और सभी मिशन निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के तेजी से विस्तार और अनुभवी वैज्ञानिकों की बढ़ती मांग के बीच प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को संस्थान में बनाए रखना आने वाले वर्षों में इसरो के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। सरकार का नया निर्णय इसी चुनौती से निपटने और देश के रणनीतिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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