समय पर पहचान और लाइफस्टाइल सुधार से रोका जा सकता है लिवर कैंसर का जोखिम – विशेषज्ञ
हर साल जून के दूसरे गुरुवार को ग्लोबल फैटी लिवर डे मनाया जाता है। इस अवसर पर दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट () ने स्पेयर सोसायटी के साथ मिलकर 2026 में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें फैटी लिवर और लिवर कैंसर के बढ़ते खतरे पर चर्चा की गई।
डॉक्टरों ने बताया कि भारत में मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज (MAFLD) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और लोग अक्सर इसके गंभीर परिणामों को नजरअंदाज कर देते हैं।
फैटी लिवर कैसे बन सकता है कैंसर की वजह?
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक फैटी लिवर की समस्या रहने पर यह धीरे-धीरे सिरोसिस में बदल सकती है और आगे चलकर लिवर कैंसर, विशेष रूप से हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (HCC), का खतरा बढ़ा देती है।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नरेश अग्रवाल ने कहा कि यदि फैटी लिवर की समय पर पहचान और इलाज हो जाए तो गंभीर जटिलताओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
वहीं, डीएससीआई के विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज त्यागी ने बताया कि यह आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले लिवर रोगों में से एक है, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉक्टरों की सलाह – ऐसे करें बचाव
नियमित व्यायाम करें
वजन नियंत्रण में रखें
संतुलित और कम वसा वाला आहार लें
समय-समय पर लिवर की जांच कराएं
डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित रखें
डीएससीआई की डायरेक्टर डॉ. सविता अरोड़ा ने कहा कि फैटी लिवर और कैंसर के बीच संबंध को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण लगातार मजबूत हो रहे हैं, इसलिए जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है।
अस्पताल के जॉइंट डायरेक्टर डॉ. रविंदर सिंह ने भी जोर दिया कि सही समय पर जीवनशैली में बदलाव करके इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है और शुरुआती चरण में इलाज भी संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फैटी लिवर को हल्के में लेना आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है, इसलिए समय रहते सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

Post a Comment