नई दिल्ली/रायपुर छत्तीसगढ़ में मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य बेहद गंभीर हैं। जांच में सामने आए अश्लील वीडियो, फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट और अन्य तकनीकी सबूत अभियोजन पक्ष के दावों को मजबूत करते हैं। इन्हीं तथ्यों को आधार बनाते हुए अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया।
मामले के अनुसार, पीड़िता मानसिक रूप से अस्वस्थ बताई गई है। आरोप है कि उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और घटना से जुड़े वीडियो भी बनाए गए। जांच एजेंसियों ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जब्त कर उनकी फोरेंसिक जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट को केस में महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में जमानत पर फैसला करते समय उपलब्ध साक्ष्यों, अपराध की प्रकृति और समाज पर उसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि मामले में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य आरोपों की गंभीरता को दर्शाते हैं।
इस फैसले के बाद आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। वहीं, मामले की आगे की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी, जहां उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यह मामला छत्तीसगढ़ में काफी चर्चा में रहा है और सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।

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