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MP में अदालतों की डिजिटल क्रांति, अब फोटो-वीडियो बनेंगे पुख्ता सबूत; ई-साक्ष्य नियम-2026 लागूDigital revolution in MP courts, photos and videos will now become solid evidence; E-Evidence Rules-2026 implemented

 


भोपाल। मध्यप्रदेश की न्यायिक व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल युग की ओर बढ़ रही है। प्रदेश में ई-साक्ष्य नियम-2026 लागू होने के बाद अदालतों में डिजिटल साक्ष्यों को लेकर प्रक्रिया आसान हो गई है। अब जांच एजेंसियों और पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत फोटो, वीडियो, ऑडियो, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कई मामलों में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के अलग प्रमाणपत्र के बिना भी स्वीकार किए जा सकेंगे, बशर्ते उनकी प्रामाणिकता निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुनिश्चित की गई हो।


नई व्यवस्था का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाना है। इससे पुलिस जांच, अभियोजन और अदालतों में सुनवाई के दौरान डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत करने में होने वाली तकनीकी बाधाएं कम होंगी। साइबर अपराध, सड़क दुर्घटनाओं, हत्या, भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका अब और अधिक प्रभावी होगी।

न्यायिक अधिकारियों का मानना है कि ई-साक्ष्य नियम लागू होने से मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी और डिजिटल युग के अनुरूप न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके लिए अदालतों, पुलिस और अभियोजन विभाग को आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल फोन, सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, बॉडी कैमरा और अन्य डिजिटल उपकरणों से प्राप्त सामग्री अब न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी। इससे साक्ष्य संग्रहण और प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और आधुनिक होने की उम्मीद है।

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