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"पुलिस वाले ही वसूली करने लगें तो आम आदमी कहां जाएगा?" सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, तीन पुलिसकर्मियों की जमानत रद्द"If the police themselves start extorting money, where will the common man go?" The Supreme Court's stern remark, cancelling the bail of three policeme

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देश की सर्वोच्च अदालत ने जौहरी से कथित जबरन वसूली के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को मिली अग्रिम जमानत रद्द करते हुए पुलिस तंत्र पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब कानून लागू करने वाले ही जबरन वसूली करने वाले बन जाएं, तो आम नागरिकों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाता है।


सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस की वर्दी जनता की सुरक्षा और कानून के पालन के लिए होती है, न कि उसका दुरुपयोग कर लोगों को डराने या अवैध वसूली करने के लिए। अदालत ने टिप्पणी की कि "यदि पुलिसकर्मी ही वसूली करने लगें, तो आम आदमी न्याय और सुरक्षा के लिए आखिर किसके पास जाएगा?"

मामला एक जौहरी से कथित रूप से धमकाकर पैसे वसूलने के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने अपने पद और अधिकार का इस्तेमाल कर दबाव बनाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत को अनुचित मानते हुए उसे रद्द कर दिया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के रक्षक यदि अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हैं, तो ऐसे मामलों को सामान्य अपराध की तरह नहीं देखा जा सकता। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं और कानून व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को पुलिस जवाबदेही और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत ने साफ कर दिया है कि वर्दी की आड़ में होने वाले कथित भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

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